Tuesday, 30 October 2018

कार्तिक स्नान का महत्व


  1.                                                    कार्तिक स्नान का महत्व 

       हमारे  धरम शास्त्रो में अशांति , पाप  आदि से बचने के कई उपाय बताये गए हैं।  उन्ही में कार्तिक मास में किया गया स्नान व् व्रत भी एक हैं।  स्कन्द पुराण  आदि अनेक धर्म ग्रन्थो में कार्तिक मास के स्नान व् व्रत की महिमा बताई गयी हैं।  कार्तिक में पुरे माह ब्रह्म मुहूर्त में  किसी नदी, तालाब व् नहर या  फोखर में स्नान कर भगवान् की पूजा किये जाने का विधान हैं।  धर्म शास्त्रों के अनुसार , कलीयुग में कार्तिक मास में किये गए व्रत, स्नान  तप को मोक्ष प्राप्ति का बताया  गया हैं।  स्कन्द पुराण के अनुसार -
      न कार्तिकसमो मासो न क्रतेन  सम युगम। 
      न वेदसद्दशम शास्त्रम न तिरथ गंगा समम।।

       कार्तिक के समान दूसरा कोई मास नहीं हैं , सतयुग के समान कोई युग नहीं हैं , वेद के समान कोई शास्त्र नहीं हैं और गंगाजी के समान कोई तिरथ नहीं हैं।  
      कार्तिक मास में स्नान का धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक महत्व भी हैं, वर्षा ऋतु  के बाद जब आसमान साफ होता हैं और सुर्य  की किरणे सीधे पृथ्वी तक आती हैं ऐसे में प्रकति का वातावरण शरीर के अनुकूल होता हैं।  प्रात : काल उठकर नदी में स्नान करने से ताजी हवा शरीर में स्फूर्ति का संचार  करती हैं।  उस प्रकार के वातावरण में कई शारीरिक बीमारिया अपने आप ही समाप्त हो जाती हैं. 

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