प्राचीन कहावत हैं की चिंता चिता के समान हैं यह सत्य हैं चिंता आदमी को जिन्दा ही मार देती हैं आज की इस भौतिकता वादी युग में मनुष्य की जिंदगी भागदोड़ में ही बीत रही हैं उसे अपने लिए ही फुर्सत नहीं हैं महानगरो में तो और भी बुरा हाल हैं वहां की जिंदगी तो भागमभाग हो रही हैं. लोगो को अपने परिवार और बच्चो तक के लिए फुर्सत नहीं हैं।






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