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Tuesday, 29 March 2016

जुकाम का देसी इलाज

       दोस्तों जुकाम एक ऐसा  रोग हैं जो अक्सर लोगो को कभी भी हो जाता हैं इसके लिए लोग तुरन्त  इंग्लिश दवाई लेते हैं लेकिन फिर भी लोगो को कोई फायदा नहीं होता हैं , मैं आपको एक ऐसा फार्मूला बता रहा हूँ जिससे जुकाम में अवश्य फायदा होता हैं।
     १. जुकाम होने पैर गरम पानी पिने से बंद नाक खुल जाती हैं और जुकाम में भी फायदा होता हैं।
    २- जुकाम होने पैर पानी गरम करते समय उसमे साबुत अदरक का टुकड़ा डाल  कर पानी को औटओ  और छान  कर उस पानी को पी जाओ , एलर्जी की जुकाम में तुरंत फायदा होगा।
    ३. अगर नाक से पानी बहता हैं तो नीम्बू  की चाय पीने से जुकाम में तुरंत फायदा होगा। 

Friday, 11 March 2016

गजेन्द्र मोक्ष से कर्जे से मुक्ति

गजेन्द्र मोक्ष से कर्जे से मुक्ति

 गजेन्द्र मोक्ष में  जब गजराज  संकट में पड जाते हैं तो वे विष्णु भगवन से प्राथना करने पर विष्णु भगवान ने गजराज की सहायता की थी।
                अतः  गजेन्द्र मोक्ष का नित्य पाठ  करने से मनुष्य अवश्य ही कर्जे से मुक्ति पा सकता हैं।
     
                आप इसी ब्लॉग में गजेन्द्र मोक्ष को  पढ़  सकते हैं। 
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कुछ उपयोगी घरेलु नुस्खे

कुछ उपयोगी घरेलु  नुस्खे 

मैंने पहले भी आपको कुछ  उपयोगी घरेलु  नुस्खे बताए थे।  आज मै आपको और घरेलु  नुस्खे बता रहा हूँ जो अजमाए हुए हैं।
१ अगर किसी को बुखार या ज्वर हो जाये तो दो लोंग  दो तीन तुलसी के पते चुटकी भर कला नमक को सिलबट्टे पैर थोड़ा सा पानी डालकर पीस ले फिर मामूली नवाया करके रोगी को पिला दे तो बुखार या ज्वर में जरूर फायदा  होगा , यह काढ़ा दो तीन दिन लगातार दे।
२ अगर किसी को जुकाम हो जाये तो निम्बू की चाय पिला दे अवश्य  ही फायदा होगा।
३- अगर किसी के शरीर में कहीं  भी किसी दुर्घटना से हड्डी में फ्रैक्चर हो जाये तो डॉक्टरी इलाज के साथ साथ मरीज को दूध एवम मन्नका  दे।  इन में कैलिश्यम की मात्र भरपूर होती हैं।  साथ में अनार भी खिलाईये।  रोगी की हड्डीया जल्दी ही जुड़ कर मजबूत हो जावेगी।
४-सुबह सुबह जल्दी उठकर मुँह की लार को आँखों में लगाने से आँखों की रौशनी बढ़ती हैं साथ ही चश्मा भी उत्तर जाता हैं।  ये नुस्खा मेरा आजमाया हुआ हैं। 
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Wednesday, 9 March 2016

कर्जे से मुक्ति का  उपाय 

 अगर कोई मनुष्य कर्जे में डूबा हो तो निम्न उपाय करने से उसको कर्जे से मुक्ति मिलेंगी
१ दारिद्र्य दहन शिव स्त्रोत  का नित्य पाठ  करने से कर्जे से मुक्ति मिलेंगी
२ लक्ष्मी नरसिंग स्त्रोत का भी नित्य  प्रात पाठ करने से कर्जे से निजात मिलेंगी
 ये दोनों स्त्रोत का पथ  आप इसी  ब्लॉग में पढ़ व् देख सकते हैं
            दारिद्र्य दहन शिव स्त्रोत

               
       

दारिद्रयदहन शिवस्तोत्रम्‌

दारिद्रयदहन शिवस्तोत्रम्‌


विश्वेश्वराय नरकार्णवतारणाय
कर्णामृताय शशिशेखरधारणाय।
कर्पूरकांतिधवलाय जटाधराय
दारिद्रयदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥1॥
गौरीप्रियाय रजनीशकलाधराय
कालान्तकाय भुजंगाधिपकङ्कणाय।
गङ्गाधराय गजराजविमर्दनाय ॥
दारिद्रयदुःखदहनाय नमः शिवाय . ॥2॥
भक्तिप्रियाय भवरोगभयापहाय
उग्राय दुर्गभवसागरतारणाय।
ज्योतिर्मयाय गुणनामसुनृत्यकाय ॥
दारिद्रयदुःखदहनाय नमः शिवाय॥3॥
चर्माम्बराय शवभस्मविलेपनाय
भालेक्षणाय मणिकुण्डलमण्डिताय।
मञ्जीरपादयुगलाय जटाधराय ॥
दारिद्रयदुःखदहनाय नमः शिवाय॥4॥
पञ्चाननाय फणिराजविभूषणाय
हेमांशुकाय भुवनत्रयमण्डिताय।
आनंतभूमिवरदाय तमोमयाय ॥
दारिद्रयदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥5॥
भानुप्रियाय भवसागरतारणाय
कालान्तकाय कमलासनपूजिताय।
नेत्रत्रयाय शुभलक्षणलक्षिताय ॥
दारिद्रयदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥6॥
रामप्रियाय रघुनाथवरप्रदाय
नागप्रियाय नरकार्णवतारणाय।
पुण्येषु पुण्यभरिताय सुरार्चिताय॥
दारिद्रयदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥7॥
मुक्तेश्वराय फलदाय गणेश्वराय
गीतप्रियाय वृषभेश्वरवाहनाय।
मातङग्‌चर्मवसनाय महेश्वराय ॥
दारिद्रयदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥8॥
वसिष्ठेन कृतं स्तोत्रं सर्वरोगनिवारणम्‌।
सर्वसम्पत्करं शीघ्रं पुत्रपौत्रादिवर्धनम्‌।
त्रिसंध्यं यः पठेन्नित्यं स हि स्वर्गमवाप्नुयात्‌
दारिद्रयदुःखदहनाय नमः शिवाय ॥9॥


Monday, 7 March 2016

Shri Laxmi narsingh stroth

।।लक्ष्मी नृसिंह स्तोत्रम्‌।।
श्री लक्ष्मी नृसिंह ऋणमोचन स्तोत्र
http://hindi.webdunia.com/hi/articles/1305/22/images/img1130522083_1_1.jpg
FILE

श्रीमत्पयोनिधिनिकेतन चक्रपाणे भोगीन्द्रभोगमणिरंजितपुण्यमूर्ते।
योगीश शाश्वतशरण्यभवाब्धिपोतलक्ष्मीनृसिंहममदेहिकरावलम्बम॥1॥

ब्रम्हेन्द्र-रुद्र-मरुदर्क-किरीट-कोटि-संघट्टितांघ्रि-कमलामलकान्तिकान्त।
लक्ष्मीलसत्कुचसरोरुहराजहंस लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम्‌॥2॥

संसारघोरगहने चरतो मुरारे मारोग्र-भीकर-मृगप्रवरार्दितस्य।
आर्तस्य मत्सर-निदाघ-निपीडितस्यलक्ष्मीनृसिंहममदेहिकरावलम्बम्‌॥3॥

संसारकूप-मतिघोरमगाधमूलं सम्प्राप्य दुःखशत-सर्पसमाकुलस्य।
दीनस्य देव कृपणापदमागतस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम्‌॥4॥

संसार-सागर विशाल-करालकाल-नक्रग्रहग्रसन-निग्रह-विग्रहस्य।
व्यग्रस्य रागदसनोर्मिनिपीडितस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहिकरावलम्बम्‌॥5॥

संसारवृक्ष-भवबीजमनन्तकर्म-शाखाशतं करणपत्रमनंगपुष्पम्‌।
आरुह्य दुःखफलित पततो दयालो लक्ष्मीनृसिंहम देहिकरावलम्बम्‌॥6॥

संसारसर्पघनवक्त्र-भयोग्रतीव्र-दंष्ट्राकरालविषदग्ध-विनष्टमूर्ते।
नागारिवाहन-सुधाब्धिनिवास-शौरे लक्ष्मीनृसिंहममदेहिकरावलम्बम्‌॥7॥

संसारदावदहनातुर-भीकरोरु-ज्वालावलीभिरतिदग्धतनुरुहस्य।
त्वत्पादपद्म-सरसीशरणागतस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम्‌॥8॥

संसारजालपतितस्य जगन्निवास सर्वेन्द्रियार्थ-बडिशार्थझषोपमस्य।
प्रत्खण्डित-प्रचुरतालुक-मस्तकस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहिकरावलम्बम्‌॥9॥

सारभी-करकरीन्द्रकलाभिघात-निष्पिष्टमर्मवपुषः सकलार्तिनाश।
प्राणप्रयाणभवभीतिसमाकुलस्यलक्ष्मीनृसिंहमम देहि करावलम्बम्‌॥10॥

अन्धस्य मे हृतविवेकमहाधनस्य चौरेः प्रभो बलि भिरिन्द्रियनामधेयै।
मोहान्धकूपकुहरे विनिपातितस्य लक्ष्मीनृसिंहममदेहिकरावलम्बम्‌॥11॥

लक्ष्मीपते कमलनाथ सुरेश विष्णो वैकुण्ठ कृष्ण मधुसूदन पुष्कराक्ष।
ब्रह्मण्य केशव जनार्दन वासुदेव देवेश देहि कृपणस्य करावलम्बम्‌॥12॥

यन्माययोर्जितवपुःप्रचुरप्रवाहमग्नाथमत्र निबहोरुकरावलम्बम्‌।
लक्ष्मीनृसिंहचरणाब्जमधुवतेत स्तोत्र कृतं सुखकरं भुवि शंकरेण॥13॥
॥ इति श्रीमच्छंकराचार्याकृतं लक्ष्मीनृसिंहस्तोत्रं संपूर्णम्‌ ॥